हाल ही 17 से 18 जनवरी, 2018 के दौरान दो दिवसीय ‘अंतर्राष्ट्रीय ऊर्जा गठबंधन मंच’ (International Solar Alliance Forum-ISAF) की मेजबानी अंतर्राष्ट्रीय सौर गठबंधन ने की यह पहल इस गठबंधन की स्थापना के 2 वर्ष बाद हो पाई|

क्या है WFES?

WFES ‘अबूधाबी सस्टेनेबिलिटी वीक’ (Abu Dhabi Sustainability Week) नामक वैश्विक पहल द्वारा आयोजित एक अनूठा कार्यक्रम है। 15-18 जनवरी को आयोजित इस कार्यक्रम की मेजबानी आबूधाबी के मसदर सिटी द्वारा की गई।

वार्षिक रूप से आयोजित की जाने वाली विश्व भविष्य ऊर्जा शिखर सम्मेलन दुनिया भर से परियोजना डेवलपर्स, वितरकों, नवोन्मेषकों, निवेशकों और खरीददारों के लिये बिज़नेस-फर्स्ट प्रकार की प्रदर्शनी है जो दुनिया की बढ़ती ऊर्जा चुनौतियों के समाधानों की खोज के लिये सभी को एक साझा मंच उपलब्ध कराती है।

क्या है ISA?

अंतर्राष्ट्रीय सौर गठबंधन कर्क और मकर रेखा के मध्य आंशिक या पूर्ण रूप से अवस्थित 121 सौर संसाधन संपन्न देशों का एक अंतर्राष्ट्रीय अंतर-सरकारी संगठन है। 6 दिसंबर, 2017 को 15 देशो द्वारा अनुमोदन होने पर अंतर्राष्ट्रीय सौर गठबंधन फ्रेमवर्क एग्रीमेंट लागू हुआ। इसने अंतर्राष्ट्रीय सौर गठबंधन को संधि आधारित अंतर्राष्ट्रीय अंतर-सरकारी संगठन का दर्ज़ा दे दिया।

अभी तक 19 देशों ने इसे स्वीकृति दी है और 48 देश इसके फ्रेमवर्क एग्रीमेंट पर हस्ताक्षर कर चुके हैं। इसका मुख्यालय गुरुग्राम (हरियाणा) में है।

ISA के प्रमुख उद्देश्यों में 1000 गीगावाट से अधिक सौर ऊर्जा उत्पादन क्षमता की वैश्विक तैनाती और 2030 तक सौर ऊर्जा में निवेश के लिये लगभग $1000 बिलियन की राशि को जुटाना शामिल है। एक क्रिया-उन्मुख संगठन के रूप में ISA सौर परियोजनाओं को जमीनी स्तर पर प्रारंभ करने में सहयोग प्रदान करता है।

सौर ऊर्जा की वैश्विक मांग को समेकित करने के लिये ISA सौर क्षमता से समृद्ध देशों को एक साथ लाता है। इससे निम्नलिखित लाभ होंगे-

 ► थोक खरीद के माध्यम से कीमतों में कमी।

► मौजूदा सौर प्रौद्योगिकियों की बड़े पैमाने पर तैनाती में आसानी।

► सामूहिक रूप से क्षमता निर्माण तथा अनुसंधान एवं विकास को बढ़ावा।

मुख्य तथ्य

1.अंतर्राष्ट्रीय सौर गठबंधन फोरम के पहले दिन 17 जनवरी, 2018 को ISA ऊर्जा मंत्रियों के विस्तृत मंत्रीस्तरीय सत्र का आयोजन किया गया।उन्होंने ऊर्जा तक सार्वभौमिक पहुँच और सोलर परियोजनाओं के विकास और अनुसंधान, नवाचार और तकनीक के लिये अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर सहयोग, सहक्रियाओं और ज्ञान साझाकरण के लाभों पर विचार प्रस्तुत किये।

2.इस अवसर पर भारत द्वारा यह रेखांकित किया गया कि समय के साथ नवीकरणीय ऊर्जा सस्ती हो गई है और यह परंपरागत ऊर्जा को प्रतिस्थापित करने के लिये तैयार है। यह स्वस्थ और धारणीय विकास का सूचक है।

3.भारत के पास विश्व में तीव्र गति वाला नवीनकरणीय ऊर्जा कार्यक्रम है और इसकी संभावना है कि भारत वर्ष 2020 से पूर्व ही अपने 175 गीगावाट की स्थापित नवीनकरणीय ऊर्जा के लक्ष्य को प्राप्त कर लेगा।इसके अतिरिक्त सौर परियोजनाओं के वित्तपोषण के लिये भारत सरकार द्वारा $350 मिलियन की सौर विकास निधि की स्थापना की घोषणा की गई।

4.अप्रैल 2018 तक ISA के अंतर्गत 100 से अधिक परियोजनाओं पर हस्ताक्षर किये जायेगे

5.ISA के अंतरिम महानिदेशक द्वारा नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा 19 से 21 अप्रैल, 2018 तक आयोजित की जाने वाली दूसरी रि-इन्वेस्ट (RE-INVEST) बैठक के संबंध में जानकारी दी गई।


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