आईएनएस अरिहंत नौसेना में शामिल

देश के रक्षा कवच को मजबूत करते हुए स्वदेशी तकनीक से बनी परमाणु पनडुब्बी आईएनएस अरिहंत को नौसेना में शामिल कर लिया गया है। आईएनएस अरिहंत भारत में ही बनाई और डिजाइन की गई देश की पहली परमाणु पनडुब्बी है। जमीन और आकाश के बाद अब पानी के भीतर से परमाणु वार करने की भारत की क्षमता को पूरा करने की दिशा में यह एक बड़ा कदम है। असल में पानी के  अंदर परमाणु हमला  करने की क्षमता किसी भी परमाणु देश के सामरिक हितों के लिए बहुत जरूरी है क्योंकि परमाणु हमला होने की स्थिति में पलटवार करने के लिए पानी के भीतर के हथियार सुरक्षित रहते हैं। पानी के भीतर होने के कारण दुश्मन पर किसी भी  अनजान जगह से परमाणु हमला  किया जा सकता है। दुश्मन के पहले परमाणु हमले में परमाणु मिसाइलें और परमाणु बम से लैस विमान बेकार भी हो गए तो भी परमाणु पनडुब्बी दुश्मन को तबाह कर देगी।

दुनिया के गिने चुने देश ही अभी तक परमाणु पनडुब्बी बना सके हैं। इनमें अमेरिका, चीन, फ्रांस, रूस और ब्रिटेन शामिल हैं। इस तरह भारत दुनिया का छठा देश होगा जो परमाणु पनडुब्बी बनाने में कामयाब हो गया है।

1.अब भारत दुनिया ऐसा देश बन गया है जिसने स्वयं परमाणु पनडुब्बी का निर्माण किया है। भारत ऐसी तीन और पनडुब्बियों का निर्माण कर रहा है, जिनमें से अरिहंत पहली है।

2.भारत की यह स्वदेशी पनडुब्बी रूस की मदद से बनी है।

3.6 हजार टन की आईएनएस अरिहंत 83 मेगावाट के प्रेशराइज्ड लाइट वाटर न्यूक्लियर रिएक्टर से ऊर्जा प्राप्त करती है।

4.इस प्रोजेक्ट को बनाने का काम 1980 के एडवांस टेक्नोलॉजी वेसल के तहत शुरू किया गया था और यह 2009 में लॉंच की गई थी।

5.आईएनएस अरिहंत बेहद उन्नत पनडुब्बी है और यह 700 किमी. तक की रेंज में वार कर सकती है।

इनमें दो तरह की मिसाइलें लगेंगी—पहली K-15 SLBM, जिसकी क्षमता 750 किमी है, जबकि दूसरी K-4 जो 3500 किमी दूर तक के लक्ष्य को निशाना बनाने में सक्षम है।

6.इसी विशेषता के कारण इसे शिप सबमर्सिबल बैलिस्टिक न्यूक्लियर श्रेणी में रखा गया है।

7.इस पनडुब्बी में यह क्षमता भी है कि पानी के अंदर से किसी भी विमान को निशाना बना सकती है।

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