केन-बेतवा नदी जोड़ो परियोजना

10,000 करोड़ रुपए की लागत वाली केन-बेतवा नदी जोड़ो परियोजना को पर्यावरण मंजूरी के लिये हरी झंडी मिल गई है। गौरतलब है कि इस परियोजना को हरी झंडी तब मिली है जब सुप्रीम कोर्ट की केंद्रीय प्राधिकार समिति, मध्य प्रदेश के पन्ना टाइगर रिज़र्व पर इस परियोजना के प्रतिकूल प्रभावों की जाँचकर  रही है और प्रभावों के न्यूनीकरण के उपायों पर विचार कर रही है।

खास बिंदु

इस महत्त्वाकांक्षी परियोजना अंतर्गत कुल 5,258 हेक्टेयर वन भूमि शामिल है जिसमें पन्ना रिज़र्व की 4141 हेक्टेयर भूमि शामिल है। उल्लेखनीय है कि पिछले साल अगस्त में राष्ट्रीय वन्यजीव बोर्ड की स्थायी समिति ने इस परियोजना को मंजूरी दे दी थी और पिछले ही साल 30 दिसम्बर को पर्यावरण वन्य एवं मंत्रालय की नदी घाटी और जल विद्युत परियोजनाओं के लिये विशेषज्ञ मूल्यांकन समिति द्वारा मंजूरी के लिये सिफारिश की गई थी।

इसी बीच 2 दिसम्बर को सुप्रीम कोर्ट की प्राधिकार समिति ने पर्यावरण वन्य एवं मंत्रालय से कहा था कि वह इस बात की जाँच करना चाहती कि पन्ना टाइगर रिज़र्व में(विशेष रूप से नदी पारिस्थितिकी तंत्र के संबंध में) इस परियोजना के प्रतिकूल प्रभावों के न्यूनीकरण के लिये क्या किया जा रहा है।

ध्यातव्य है कि पर्यावरण वन्य एवं मंत्रालय ने इस परियोजना से संबंधित दस्तावेज़ प्राधिकार समिति को तब सौंपा था जब पिछले सप्ताह राष्ट्रीय वन्यजीव बोर्ड की स्थायी समिति ने इस परियोजना को मंजूरी दे दी थी। यदि प्राधिकार समिति राष्ट्रीय वन्यजीव बोर्ड के फ़ैसले से संतुष्ट नहीं होती है तो वह इसे सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दे सकती है।

केंद्र सरकार की इस महत्त्वाकांक्षी परियोजना की लागत 10,000 करोड़ रुपये से बढ़कर अब 18,000 करोड़ रुपये होने की सम्भावना व्यक्त की गई है। विदित हो कि इस परियोजना से वन्यजीवों के पारिस्थितिकी तंत्र में व्यवधान की आशंका है और इसके न्यूनीकरण के लिये इस वन्यभूमि को मोड़ना होगा, इस परियोजना के लिये वन्य जीवन, वन और पर्यावरण से संबंधित अलग-अलग स्वतंत्र समितियों द्वारा मंजूरी आवश्यक होगी और ऐसी सम्भावना है कि प्रत्येक समिति अपने प्रभाव आकलन के हिसाब से इस परियोजना की लागत तय करेगी।

इस परियोजना से जुड़े हुए विशेषज्ञों का मानना है कि इस परियोजना से प्रभावित परिवारों के पुनर्वास आदि की मूल्य की लागत का फिर से आकलन करने पर लागत में वृद्धि अवश्य होगी क्योंकि परियोजना की अनुमानित लागत वर्ष 2008-09 के आँकड़ों पर आधारित है और वर्तमान समय में कुल लागत 18,000 करोड़ रुपये तक की हो सकती है।

परियोजना की मुख्य विशेषता

इस परियोजना की मुख्य विशेषता 230 किलोमीटर लंबी नहर और विभिन्न बैराज और बाँधों की एक श्रृंखला का निर्माण है जो केन और बेतवा नदियों को आपस में जोड़ेंगे। इस उपक्रम से मध्य प्रदेश में 3.5 लाख हेक्टेयर और उत्तर प्रदेश के बुंदेलखंड में 14,000 हेक्टेयर भूमि में फसलों की सिंचाई सुलभ हो जाएगी।