जल्लीकट्टू

तमिलनाडु में जल्लीकट्टू खेल पर लगे प्रतिबंध को लेकर राज्य भर में विरोध प्रदर्शन जारी है, चेन्नई के मरीना बीच पर हजारों की तादाद में लोग जमा हुए हैं और मांग कर रहे हैं कि पोंगल के मौके पर होने वाले जल्लीकट्टू खेल पर सुप्रीम कोर्ट ने जो प्रतिबंध लगाया है, उसे हटाया जाए|

गुरुवार को तमिलनाडु के मुख्यमंत्री ओ पन्नीरसेल्वम ने प्रधानमंत्री मोदी से इसी सम्बन्ध में मुलाक़ात की जिसमे मोदी ने कहा कि जल्लीकट्टू का मामला अदालत का है इसलिए वो इसमें दखल नहीं दे सकते. लेकिन प्रधानमंत्री ने मुख्यमंत्री को ये ज़रूर आश्वासन दिया कि जल्लीकट्टू मुद्दे पर केंद्र सरकार राज्य सरकार द्वारा उठाये गये कदमों का समर्थन करेगी.

जल्‍लीकट्टू है क्या?

जल्‍लीकट्टू तमिल नाडु के ग्रामीण इलाक़ों का एक परंपरागत खेल है जो पोंगल त्यौहार पर आयोजित कराया जाता है और जिसमे बैलों से इंसानों की लड़ाई कराई जाती है. जल्लीकट्टू को तमिलनाडु के गौरव तथा संस्कृति का प्रतीक कहा जाता है. तमिलनाडु से सुप्रीम कोर्ट के वकील वी. सालियन के अनुसार ये 5000 साल पुराना खेल है जो उनकी संस्कृति से जुड़ा है|

तमिल भाषा के अनुसार जल्ली’ शब्द दरअसल ‘सल्ली’ से आया है जिसका मतलब होता है ‘सिक्के’ और कट्टू का अर्थ है ‘बांधा हुआ.’ जल्लीकट्टू सांडों का खेल है जिसमें उसके सींग पर कपड़ा बांधा जाता है. जो खिलाड़ी सांड के सींग पर बांधे हुए इस कपड़े को निकाल लेता है उसे ईनाम के रूप में सिक्के या पैसे मिलते हैं. इसलिए इस खेल को जल्लीकट्टू के नाम से जाना जाता है|

इस तरह का खेल स्पेन में भी होता है जिसे बुल फाइट कहते हैं और वहां ये खेल काफी लोकप्रिय है|

क्यों लगाया गया प्रतिबन्ध

जानवरों की सुरक्षा वाली संस्था पेटा के अनुसार जल्‍लीकट्टू खेल के दौरान बैलों के साथ क्रूरता की घटनाएं होती हैं. इलज़ाम ये भी है कि बैलों को नशीले पदार्थ खिलाये जाते हैं, जानवरों की सुरक्षा करने वाली संस्था पेटा इस मामले को सुप्रीम कोर्ट में ले गयी,अदालत ने 2014 में इस खेल पर पाबंदी लगाने का फैसला सुनाया|

क्यों है इतना चर्चा में

सुप्रीम कोर्ट ने पोंगल के वक्त खेले जाने वाले इस खेल जल्‍लीकट्टू पर रोक लगा दी है. पशुओं के अधिकारों की रक्षा करने के काम करने वाली संस्थाओं ने इस खेल को जानवरों के लिए हानिकारक बताया है, वहीं तमिलनाडु की जनता इसे अपने संस्कृति का एक अहम हिस्सा बताते हुए प्रतिबंध को वापस लेने की मांग कर रही है. कुछ दिन पहले अभिनेता कमल हासन और रजनीकांत ने इस खेल का समर्थन करते हुए कहा था कि सांड़ों की लड़ाई का यह खेल तमिल संस्कृति का हिस्सा है,रजनीकांत ने कहा था कि ‘चोट से बचने के लिए खेल के नियमन को लेकर नियम बनाए जा सकते हैं लेकिन क्या किसी संस्कृति को अस्वीकार करना सही है?’

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