झीलें (महत्वपूर्ण जानकारी)

झील जल का वह स्थिर भाग है जो चारो तरफ से स्थलखंडों से घिरा होता है। झील की दूसरी विशेषता उसका स्थायित्व है। सामान्य रूप से झील भूतल के वे विस्तृत गड्ढे हैं जिनमें जल भरा होता है। झीलों का जल प्रायः स्थिर होता है। झीलों की एक महत्वपूर्ण विशेषता उनका खारापन होता है लेकिन अनेक झीलें मीठे पानी की भी होती हैं। झीलें भूपटल के किसी भी भाग पर हो सकती हैं। ये उच्च पर्वतों पर मिलती हैं, पठारों और मैदानों पर भी मिलती हैं तथा स्थल पर सागर तल से नीचे भी पाई जाती हैं।

झीलों का जीवनकाल

अधिकांशत: झीलें अस्थायी अस्तित्व की होती हैं। मनुष्य अपने जीवनकाल में ही उनकी उत्पत्ति, विकास और अंत की अवस्थाएँ देख लेता है। पर्वतीय प्रदेशों में जो झीलें अवरोधन के कारण बन जाती हैं, वे अवरोधन हट जाने पर शीघ्र ही लुप्त हो जाती हैं। नम देशों में झीलों के तल में अवसाद (sediment) एकत्र होने से वे छिछली हो जाती हैं और यदि उनमें से किसी नदी का उद्गम होता है, तो वे शीघ्र ही विलीन हो जाती हैं।

झीलों के प्रकार

1.टेक्टोनिक झीलें

इस तरह की झील पृथ्वी की पपड़ीयों के ऊपर नीचे धसने से उत्पन्न होती है| कैस्पियन सागर इसका उदाहरण है भारत में कश्मीर की वुलर झील(Wular Lake) तथा कुमायूँ हिमालय की अनेक झीले इनके उदाहरण हैं|

3.ज्वालामुखी के उद्गार से बनी झीलें Volcanic Lakes

ज्वालामुखी उद्गार के शांत होने के पश्चात उनके मुख में वर्षा का जल एकत्रित होने से इस प्रकार की झीलों का निर्माण होता है| महाराष्ट्र के बुलढाना जिले में स्थित  लोनार झील(Lonar Lake)  और अफ्रीका की विक्टोरिया झील इसी प्रकार से बनी हुई है|

3.अनूप झीले Lake formed at stream mouth

नदियों के मुहाने पर समुद्र की धाराएँ बालू मिट्टी के टीले बना कर जल क्षेत्र को समुद्र से अलग कर देती हैं, जैसे उड़ीसा की चिल्का झील(Chilka Lake), नेल्लोर की पुलीकट झील(Pulikat Lake), कृष्णा और गोदावरी डेल्टा में कोलेरु झील(Koleru Lake)| इसी प्रकार केरल राज्य में भी असंख्य लगून और कयाल पाए जाते हैं|

4.हिमानी द्वारा बनी झीलें Glacial Lakes

हिमानी द्वारा बनाए गये गड्डों में जब हिमानियाँ पहाड़ो को छोड़ कर नीचे उतरने लगती है तब अपने मार्ग में शैलों की कांट-छाँट करते हुए कई गड्ड बनती है| यही गड्डे कालांतर में उनके पिघले हुए जल के भर जाने पर झील का रूप ले लेते है| यह मीठे पानी की झीलें होती हैं क्योंकि इनमें विभिन्न प्रकार के लवणों का जमाव नहीं होने पाता है।कुमायूँ हिमालय की अधिकांश झीलें इसी प्रकार की हैं। इनके उदाहरण हैं – राकसताल, नैनीताल, सातताल, भीमताल, नौकुचिया ताल, खुरपाताल, समताल, पूनाताल, मालवाताल आदि।

5.वायु द्वारा निर्मित झीलें Aero lion Playa lakes

इस प्रकार की झीलें मुख्यतः पश्चिमी राजस्थान के थार मरुस्थल में पाई जाती हैं, इन्हें ‘ढाढ़’ भी कहा जाता है| यह झीले बालू के टीलो के बीच की नीची ज़मीन पर वर्षा के जल भर जाने पर बनती हैं| जैसे राजस्थान की सांभर, डिडवाना, लून, कनास, पॅंच-भद्रा ऐसी झीलें हैं| यह झीलें अधिकतर खारी होती हैं|

6.भूमि खिसकने से बनने वाली झीलें Rock-Fall Basins or Lakes

नदी घाटी में जब पत्थरों के अपक्षय और जमाव से जलधारा का मार्ग अवरुद्ध हो जाता है और ऐसी आस्थाई झीलें बन जाती हैं| 1893 में अलकनंदा नदी के मार्ग में भूस्खलन द्वारा ‘गोहना’  नमक झील बन गयी थी| नदी मार्ग में अक्सर इनमें भयानक बाढ़ आ जाती है| ब्रह्मपुत्र नदी के मार्ग में ऐसी झीलें बनती रहती हैं जिसे राफ्ट झीलें(Raft Lakes) कहते हैं|

7.विसर्ष और छाडन झीले  Meandering and Oxbow Lakes

नदी के मैदानी भागों में टेढ़े-मेढ़े मार्गों के कारण कई जगह रुकावट पैदा होने से  जल जमा हो जाता है तो इस प्रकार की झीले बन जाती हैं अथवा मैदानी प्रदेशों में नदी जब धीमें धीमें बहती तो भी ऐसी झीलें बन जाती है| ब्रह्मपुत्र एवं गंगा के मध्य घाटियों में ऐसी झीले पाई जाती हैं|

महत्त्वपूर्ण तथ्य

1.तिब्बत की टिसो सिकरू संसार की सबसे ऊँची झील है जो तिब्बत के पठार पर १८,२८४ फीट की ऊंचाई पर स्थित है। इसके विपरीत मृत सागर संसार की सबसे नीची झील है, जो सागर तल से भी १,३०० फीट नीची है। इसकी तली सागर तल से २,५०० फीट निचाई पर है।

2.कुछ झीलें अधिक गहरी होती हैं जैसे साइबेरिया की बैकाल झील, जिसकी गहराई १.६ किलोमीटर से अधिक है।इसके विपरीत कुछ झीलें अत्यन्त उथली होती हैं। गर्मी के मौसम में सूख जाने के कारण ये मौसमी झील कही जा सकती हैं।

3.क्षेत्रफल में झीलें छोटी-बड़ी, सभी तरह की होती है हिमानीकृत झील (टार्न झील) कुछ वर्ग मीटर तक ही विस्तृत होती हैं जबकि लाखों वर्ग किलोमीटर क्षेत्रफल वाली विस्तृत झीलें हैं। कैस्पियन सागर एक विस्तृत झील है जिसका क्षेत्रफल ४,३०,००० वर्ग किलोमीटर है। महाद्वीपों के आन्तरिक भागों में स्थित विस्तृत झीले जैसे कैस्पियन सागर, अरब सागर, मृत सागर, संयुक्त राज्य अमेरिका तथा कनाडा की बृहत झीलें, अफ्रीका की विक्टोरिया तथा साइबेरिया की बैकाल झीले आकार की दृष्टि से सागर के समान हैं।

4.भू-तल पर अधिकांश झीलें उत्तरी गोलार्ध में स्थित हैं। फिनलैंड में तो इतनी अधिक झीलें हैं कि इसे झीलों का देश ही कहा जाता है। यहाँ पर १,८७,८८८ झीलें हैं जिसमें से ६०,००० झीलें बेहद बड़ी हैं। पृथ्वी पर अनेक झीलें कृत्रिम हैं जिन्हें मानव ने विद्युत उत्पादन के लिए, कृषि-कार्यों के लिए या अपने आमोद-प्रमोद के लिए बनाया है।

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