नासा का जेम्स वेब

नासा ने अपने अब तक के सबसे बड़े टेलिस्कोप का निर्माण सफलतापूर्वक पूरा कर लिया है. यह टेलिस्कोप हब्बल से 100 गुना अधिक शक्तिशाली है और उन आकाशगंगाओं का पता लगा सकता है जो ब्रह्मांड के शुरुआती काल में बनी थीं|

हब्बल स्पेस टेलिस्कोप नासा के लिए 26 साल से काम कर रहा है और अब उसकी जगह जेम्स वेब स्पेस टेलिस्कोप लेगा.|

इस टेलीस्कोप का नाम नासा के प्रसिद्ध वैज्ञानिक जेम्स वेब के नाम पर रखा गया है, जो नासा के दूसरे अध्यक्ष थे| अंतर्राष्ट्रीय वैज्ञानिकों के सहयोग से इस स्पेस टेलीस्कोप को बनाने में 20 वर्ष का समय लगा है, इनमें नासा के साथ यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी और कनाडाई अंतरिक्ष एजेंसी के वैज्ञानिक शामिल हैं इसे बनाने में 8.7 बिलियन डॉलर (लगभग 58 हजार करोड़ रुपये) का अनुमानित खर्च आया है|

जेम्स वेब स्पेस टेलीस्कोप को अक्टूबर 2018 में फ्रेंच गुयाना से एरियन-5 रॉकेट से अंतरिक्ष में स्थापित करने की योजना है. अभी इसके कई परीक्षण होने बाकी हैं|

प्रमुख विशेषताएं

1.यह टेलीस्कोप इतना अधिक शक्तिशाली है कि पृथ्वी से चंद्रमा की दूरी पर उड़ रहे भंवरे को भी उसके द्वारा प्रतिबिंबित प्रकाश, थर्मल विकिरण और शरीर से उत्सर्जित होने वाली ऊष्मा की वजह से स्पष्ट देखा जा सकेगा|

2.जेम्स वेब टेलीस्कोप के इंफ्रारेड कैमरे इतने अधिक संवेदनशील हैं कि उन्हें सूर्य की किरणों से बचाना जरूरी है|

3.टेनिस कोर्ट के आकार के पांच स्तरीय सनशील्ड इसे सूर्य की किरणों से बचाएंगे ताकि टेलीस्कोप के इंफ्रारेड सेंसरों पर इनका असर न हो सके| सनशील्ड की पांचों सतहें मनुष्य के बाल की तरह ही सूक्ष्म हैं।

4.यह सतहें टेलीस्कोप की गर्म एवं ठंडी सतहों के बीच तापमान कम रखने के लिए एक साथ काम करती हैं। सनशील्ड की प्रत्येक सतह अपनी अगली सतह से ठंडी है।

5.अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी ने जेम्स वेब स्पेस टेलीस्कोप के पहले महत्वपूर्ण ऑप्टिकल उपकरण को पूरी तरह संकलित प्राथमिक दर्पण बना दिया है जिसे ‘सेंटर ऑफ कर्वचर टेस्ट’ नाम दिया गया है।

6.इस दर्पण की माप के विभिन्न चरणों में परीक्षण और इसके परिणामों की तुलना इस टेलीस्कोप के लिए यह सुनिश्चित करेंगे कि यह अंतरिक्ष में काम करेगा।

7.इस टेलीस्कोप के दर्पण पर सोने की बेहद महीन परत चढ़ाई गई है ताकि यह इंफ्रारेड परावर्तन के अनुकूल हो सके|

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