पेरिस समझौता और भारत

विश्व में तीसरे सबसे बडे कार्बन उत्सर्जक देश भारत ने पेरिस जलवायु समझौते का अनुमोदन कर दिया. संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि सैयद अकबरुद्दीन ने राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी द्वारा हस्ताक्षरित समझौते के अनुमोदन के दस्तावेज न्यूयॉर्क में आयोजित एक विशेष समारोह में संयुक्त राष्ट्र में करार विभाग के प्रमुख सैंटियागो विलालपांडो को महात्मा गांधी की 147वीं जयंती के मौके पर आयोजित एक कार्यक्रम में सौंपे, जिसमें संयुक्त राष्ट्र के शीर्ष अधिकारी एवं वरिष्ठ राजनयिक मौजूद थे.

इसके साथ ही भारत इस समझौते में शामिल होने वाला 62वां देश बन गया है. वर्तमान में वैश्विक कार्बन उत्सर्जन में भारत की भागीदारी 4.5 प्रतिशत है, अब इस समझौते के तहत भारत 2030 तक 40 प्रतिशत बिजली गैर-जीवाश्म ईंधन स्रोतों से उत्पादित करने के लिए प्रतिबद्ध होगा.

भारत से पहले विश्व के दो सबसे बड़े उत्सर्जक अमेरिका और चीन ने पेरिस समझौते का औपचारिक अनुदोदन किया था। वैश्विक कार्बन उत्सर्जन में इन दोनों देशों की 40 प्रतिशत भागीदारी है.

यूरोपीय संघ ने भी इस समझौते के अनुमोदन का निर्णय लिया है जिससे इस समझौते के लागू होने के लिए अनिवार्य 55 प्रतिशत उत्सर्जन की सीमा भी पार हो जाएगी.

जर्मनी ने 23 सितंबर को समझौते का अनुमोदन कर दिया था, लेकिन यूरोपीय संघ के नियमों के अनुसार लगभग 12 प्रतिशत उत्सर्जन के लिए जिम्मेदार यूरोपीय देशों को  एक गुट के रूप में अपना अनुमोदन जमा कराने के लिए सभी 28 सदस्यों की मंजूरी  जरूरी थी.

पेरिस समझौते के उद्देश्य –

1. पेरिस समझौता पर्यावरण और जलवायु परिवर्तन को लेकर विश्व में पहला व्यापक समझौता है.

2. इस समझौते को पेरिस में पिछले साल दिसंबर में जलवायु परिवर्तन पर संयुक्त राष्ट्र फ्रेमवर्क कन्वेंशन के 195 पक्षों ने पारित किया था।

3. इसका मुख्य उद्देश्य वैश्विक जलवायु परिवर्तन (तापमान वृद्धि) को 2 डिग्री सेल्सियस से नीचे रखना और इसे 1.5 डिग्री सेल्सियस तक सीमित करने के प्रयास करना.

3.जितनी जल्दी हो सके हरित गृह गैस उत्सर्जन की उच्च सीमा हासिल करना और इन गैसों को कम करने के लिए इस शताब्दी के दूसरे हिस्से में संतुलन हासिल करना.

5.हर पाँच सालों में प्रगति की समीक्षा करना.

6.2020 तक विकासशील देशों को पर्यावरण के लिए 100 अरब डॉलर की मदद देना और भविष्य में भी वित्तीय मदद के लिए प्रतिबद्ध रहना.

7.समझौते के लागू होने के बाद इसमें शामिल देशों के इससे अलग होने के लिए कम से कम तीन साल तक प्रतीक्षा करना

8.यह समझौता 55 प्रतिशत उत्सर्जन के लिए जिम्मेदार 55 देशों द्वारा संयुक्त राष्ट्र में अनुमोदन संबंधी दस्तावेज जमा कराने के 30 दिन बाद लागू होगा.

9.इस समझौते में देशों से जलवायु परिवर्तन से निपटने एवं भविष्य में स्थायी रूप से कम कार्बन उत्सर्जन के लिए आवश्यक निवेश करने एवं कदमों को तेज करने की अपील की गई है।

10.विश्व के सबसे बड़े कार्बन उत्सर्जक देश इसमें जुड़ चुके हैं जो अन्य राष्ट्रों को भी प्रेरित करता है, क्यों की जलवायु परिवर्तन का असर वैश्विक पड़ता है और ये सभी की सार्वजानिक नैतिक ज़िम्मेदारी है की इसकी रक्षा करें |

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