पेरिस समझौता बना अंतरराष्ट्रीय कानून

जलवायु परिवर्तन का मुकाबला करने के लिए पेरिस समझौता 4 नवंबर को अंतरराष्ट्रीय कानून बन गया। वैज्ञानिकों की उम्मीद से कहीं अधिक तेजी से वैश्विक तापन (Global Warming) की बढ़ती आशंकाओं के बीच यह ऐतिहासिक समझौता बताता है कि विश्व के देश ‘ग्लोबल वार्मिंग’ से निपटने को लेकर गंभीर हैं।

मुख्य तथ्य  

1.इस समझौते पर 192 पक्षों ने पेरिस में पिछले वर्ष दिसंबर में हस्ताक्षर किये थे।

2.यह समझौता ग्लोबल वार्मिंग को दो डिग्री सेल्सियस सीमित करने की मांग करता है।

3.आने वाले समय में कई और देशों के इस समझौते में शामिल होने की उम्मीद है।

4.यह समझौता जीवाश्म ईंधनों जैसे कोयला और तेल के उपयोग में कमी करने को लेकर प्रतिबद्धता का है|

5.वर्तमान में इसके लिये 97 देश सहमत हो गए हैं जो कुल वैश्विक ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन के 67.5% के लिये जिम्मेदार हैं|

6.पेरिस समझौता, जलवायु परिवर्तन पर संयुक्त राष्ट्र फ्रेमवर्क कन्वेंशन (UNFCCC) के तहत किया गया है जो ग्रीनहाउस गैसों के शमन, अनुकूलन और इसके लिये 2020 से वित्तीय सहायता शुरू करने को लेकर है|

7.यह समझौता ध्रुवीय बर्फ के पिघलने, समुद्र जल स्तर में वृद्धि और कृषि योग्य भूमि के रेगिस्तान में तब्दील होने की समस्या के हल के लिए अंतराष्ट्रीय समुदाय की एक नई प्रतिबद्धता को रेखांकित करता है।

8.क्योटो  प्रोटोकॉल को लागू होने में सात साल से भी अधिक का समय लगा था, जबकि पेरिस जलवायु समझौता एक साल से भी कम समय में लागू हो गया।

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