गोवा में ही 16 अक्टूबर 2016 को ब्रिक्स-बिम्सटेक आउटरीच शिखर सम्मेलन का पूर्ण अधिवेशन संपन्न हुआ| बिम्सटेक’—यानी ‘द बे ऑफ बंगाल इनिशिएटिव फॉर मल्टी-सेक्टरल टेक्निल एंड इकोनोमिक कोऑपरेशन’ में भारत के अलावा बंगाल की खाड़ी के आसपास के देश बंग्लादेश, भूटान, नेपाल, श्रीलंका, म्यांमार और थाईलैंड शामिल हैं। इस सम्मलेन की अध्यक्षता प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी ने की|

सम्मलेन में शामिल नेताओं ने महत्वपूर्ण वैश्विक, क्षेत्रीय मुद्दों और संयुक्त राष्ट्र सतत विकास के लिए एजेंडा 2030 तथा आपसी हित और विचारों के आदान प्रदान के मामलों पर चर्चा करने के लिए ब्रिक्स और बिम्सटेक नेताओं के बीच आयोजित शिखर सम्मेलन के प्रति सराहना की भावना व्यक्त की।

क्या है बिम्सटेक?

बिम्सटेक वास्तव में बंगाल की खाड़ी बहु-क्षेत्रीय तकनीक तथा आर्थिक सहयोग पहल (Bengal Initiative for Multi-Sectoral Technical and Economic Cooperation, BIMSTEC) का संक्षिप्त रूप है, जिसका गठन 6 जून 1997 को किया गया था।

बिमस्टेक के सदस्य देशों में बांग्लादेश, भारत, नेपाल, भूटान, म्यांमार, श्रीलंका तथा थाइलैंड शामिल हैं। पहली बिम्सटेक बैठक वर्ष 2004 में थाइलैंड में तथा दूसरी वर्ष 2008 में भारत में आयोजित की गयी थी। बिम्सटेक की अध्यक्षता म्यांमार वर्ष 2009 से कर रहा है।

सम्मलेन का महत्त्व-

1.बिम्सटेक संगठन का भारत की विदेश नीति के लिहाज से विशेष महत्व है क्योंकि ये देश भारत की एक्ट-ईस्ट नीति का अहम हिस्सा है।

2.भारत ने ब्रिक्स शिखर सम्मेलन की मेजबानी की और परंपराओं के अनुसार, पड़ोसी देशों को आउटरीच सम्मेलन के लिए आमंत्रित किया था।

3.हाल ही में जम्मू एवं कश्मीर के उड़ी में हुए आतंकवादी हमले के बाद भारत ने दक्षेस की जगह बिम्स्टेक समूह में शामिल देशों को आमंत्रित करने का फैसला किया था।

4.दक्षेस देशों की जगह बिम्सटेक देशों को आमंत्रित करने को इसी दिशा में एक और कदम के रूप में देखा जा रहा है।

7.प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में इस तरह का यह पहला सम्मेलन था।इस बैठक में ब्रिक्स और बिम्सटेक दोनों संगठनों के सदस्य देशों ने भाग लिया।

8.पाकिस्तान, अफगानिस्तान और मालदीव दक्षिण एशियाई क्षेत्रीय सहयोग संगठन (दक्षेस) के सदस्य हैं, लेकिन वे बिम्सटेक के सदस्य नहीं हैं|

9.ब्रिक्स और बिम्सटेक का यह पहला संयुक्त सम्मेलन था।

सम्मलेन में शामिल नेता-

बिम्सटेक देशों के नेताओं में श्रीलंका के राष्ट्रपति मैत्रीपाला सिरीसेना, भूटान के प्रधानमंत्री शेरिंग तोबगे, नेपाल के प्रधानमंत्री पुष्प कमल दहल, बांग्लादेश की प्रधानमंत्री शेख हसीना वाजेद, थाईलैंड के प्रधानमंत्री प्रयुत चान ओचा  और म्यांमार की विदेश मंत्री आंग सान सू ची शामिल थे।


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