भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो)

1962 में जब भारत सरकार द्वारा भारतीय राष्‍ट्रीय अंतरिक्ष अनुसंधान समिति (इन्‍कोस्‍पार) का गठन हुआ तब भारत ने अंतरिक्ष में जाने का निर्णय लिया। कर्णधार, दूरदृष्‍टा डॉ. विक्रम साराभाई के साथ इन्‍कोस्‍पार ने ऊपरी वायुमंडलीय अनुसंधान के लिए तिरुवनंतपुरम में थुंबा भूमध्‍यरेखीय राकेट प्रमोचन केंद्र (टर्ल्‍स) की स्‍थापना की।

इसका मुख्यालय कर्नाटक प्रान्त की राजधानी बेंगालुरू में है। इसरो के वर्तमान निदेशक ए एस किरण कुमार हैं संस्थान में लगभग सत्रह हजार कर्मचारी एवं वैज्ञानिक कार्यरत हैं। संस्थान का मुख्य कार्य भारत के लिये अंतरिक्ष संबधी तकनीक उपलब्ध करवाना है। अन्तरिक्ष कार्यक्रम के मुख्य उद्देश्यों में उपग्रहों, प्रमोचक यानों, परिज्ञापी राकेटों और भू-प्रणालियों का विकास शामिल है।

70 का दशक प्रयोगात्‍मक युग था जिस दौरान ‘आर्यभट्ट’, ‘भास्‍कर’, ‘रोहिणी’ तथा ‘एप्पल‘ जैसे प्रयोगात्‍मक उपग्रह कार्यक्रम चलाए गए। इन कार्यक्रमों की सफलता के बाद 80 का दशक संचालनात्‍मक युग बना जबकि ‘इन्सेट’ तथा ‘आईआरएस’ जैसे उपग्रह कार्यक्रम शुरू हुए। आज इन्सेट तथा आईआरएस इसरो के प्रमुख कार्यक्रम हैं। अंतरिक्ष यान के स्‍वदेश में ही प्रक्षेपण के लिए भारत का मज़बूत प्रक्षेपण यान कार्यक्रम है।

आज भारत न सिर्फ अपने अंतरिक्ष संबंधी आवश्यकताओं की पूर्ति करने में सक्षम है बल्कि दुनिया के बहुत से देशों को अपनी अंतरिक्ष क्षमता से व्यापारिक और अन्य स्तरों पर सहयोग कर रहा है। इसरो वर्तमान में ध्रुवीय उपग्रह प्रक्षेपण यान (पी.एस.एल.वी.) एवं भूस्थिर उपग्रह प्रक्षेपण यान (जी.एस.एल.वी.) की सहायता से क्रमश: कृत्रिम एवं भू-स्थायी कृत्रिम उपग्रह प्रक्षेपित करता है।

इसरो को शांति, निरस्त्रीकरण और विकास के लिए साल 2014 के इंदिरा गांधी पुरस्कार से सम्मानित किया गया। मंगलयान के सफल प्रक्षेपण के लगभग एक वर्ष बाद इसने २९ सितंबर २०१५ को एस्ट्रोसैट के रूप में भारत की पहली अंतरिक्ष वेधशाला स्थापित किया।

जून २०१६ तक इसरो लगभग 20 अलग-अलग देशों के 57 उपग्रहों को लॉन्च कर चुका है, और इसके द्वारा उसने अब तक 10 करोड़ अमेरिकी डॉलर कमाए हैं|

प्रौद्योगिक क्षमता के अतिरिक्‍त, इसरो ने देश में विज्ञान एवं विज्ञान की शिक्षा में भी योगदान दिया है। अंतरिक्ष विभाग के तत्‍वावधान में सुदूर संवेदन, खगोलिकी तथा खगोल भौतिकी, वायुमंडलीय विज्ञान तथा सामान्‍य कार्यों में अंतरिक्ष विज्ञान के लिए विभिन्‍न समर्पित अनुसंधान केंद्र तथा स्‍वायत्‍त संस्‍थान कार्यरत हैं। वैज्ञानिक परियोजनाओं सहित इसरो के अपने चन्‍द्र तथा अंतरग्रहीय मिशन वैज्ञानिक समुदाय को बहुमूल्‍य आंकड़ा प्रदान करने के अलावा, विज्ञान शिक्षण को बढ़ावा देते हैं, जो कि विज्ञान को समृद्ध करता है।

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