भारत की अपवाह प्रणाली (Drainage system)-2

उत्तर भारत की नदियाँ-2

चंबल नदी

यह नदी मध्य प्रदेश में जनपाव पहाड़ियों से निकलती है। यह पहले उत्तर पूर्व की ओर बढ़कर मध्य प्रदेश के भिंड व मुरैना जिलों एवं राजस्थान के झालावाड़, कोटा,, बूँदी, और धौलपुर जिलों से बहते हुए इटावा के निकट यमुना में मिल जाती है। कोटा में भैंसरोड गढ़ के  निकट 18 मी. की उँचाई से इसका जल चूलिया प्रपात से गिरता है। इस नदी की सहायक नदियाँ काली सिंधु, सिवान, पार्वती और बनास हैं। इस नदी ने अपने मध्यवर्ती भागों में बीहड़ों का निर्माण किया है। राजस्थान की यह एकमात्र सदावाहिनी नदी है। इस नदी का पौराणिक नाम ‘चरमावती’ था।

बेतवा व वेत्रावती नदी

यह नदी मध्य प्रदेश भोपाल से निकालकर हमीरपुर के निकट यमुना में मिल जाती है। सांची और विदिशा जैसे प्राचीन नगर इसके किनारे स्थित हैं। इस नदी की कुल लंबाई 480 कीं. है। माताटीला बाँध (उत्तर प्रदेश) तथा राजघाट बाँध इसी नदी पर अवस्थित हैं।

सोन या स्वर्ण नदी

सोन नदी अमरकंटक की पहाड़ियों से निकल नर्मदा नदी के उदगम के पास से ही निकलती है। यह नदी दानापुर (पटना) के निकट गंगा में मिल जाती है।

दक्षिणी टोन्स या तमसा नदी

यह तैमूर की पहाड़ियों में स्थित तमसा कुंड नमक जलाशय से निकलकर उत्तर-पूर्वी दिशा में बहते हुए इलाहाबाद के सिरसा के निकट गंगा में मिल जाती है। यह नदी कई झरने बनाती है।

ब्रह्मपुत्र नदी

यह नदी बोरांग, तिब्बत के आंगज़ी ग्लेशियर से निकलती है। पहले कुछ विद्वानों के अनुसार यह नदी कैलाश पर्वत पर मानसरोवर के निकट चेमायुंग दुंग ग्लेशियर, तिब्बत से निकलती है। किन्तु उपग्रह तकनीकों से वैज्ञानिकों ने यह निष्कर्ष निकाला है की यह नदी आंगज़ी ग्लेशियर से ही निकलती है।ब्रह्मपुत्र नदी की लम्बाई अपने उद्गम स्थान से लेकर पद्मा नदी में मिलने तक लगभग 2900 किलोमीटर है।

प्रारंम्भ में यह नदी तिब्बत में सान्ग-पो के नाम से बहती है। इसके बाद नामचा-बरवा पर्वत के पास दक्षिण पश्चिम दिशा में मुड़ कर अरूणाचल प्रदेश में प्रवेश करती है जहाँ इसे सियांग कहा जाता है। उँचाई को छोड़कर यह नदी जब मैदानों में प्रवेश करती है तो इस दिहांग के नाम से जाना जाता है। असम में यह नदी काफ़ी चौड़ी हो जाती है। कहीं-कहीं इस नदी की चौड़ाई 10 किमी. तक है।

डिब्रूगढ और लखीमपुर के समीप यह नदी दो भागों में बँट जाती है। असम में ही नदी की दोनो शाखाएँ मिलकर दुनिया का सबसे बड़ा नदी द्वीप ‘माजुली द्वीप बनाती हैं। असम में प्रायः इन नदी को ब्रह्मपुत्र ही कहते है। बोडो लोग इस नदी को ‘भुल्लम-भुथर’ भी कहते है जिसका अर्थ होता है ‘कल-कल की आवाज़ निकालना’।

ग्वालण्डो के निकट ब्रह्मपुत्र पद्मा नदी से मिल जाती है। आगे बढ़ने पर इसमें मेघना नदी भी मिल जाती है। ब्रह्मपुत्र में मिलने वाली नदियाँ दिबांग, लोहित, सेसरी, निचली दिबांग, स्वर्ण सीरी, भाद्री, घनसीरी, बनण्दी, मानष-संकोष, तीस्ता, बूढ़ी दिहांग, दिसांग-दिखो, झांझी, कुलसी, जिंज़ीरम, पद्मा, मेघना और यमना हैं। पद्मना और यमना चांदपुर के निकट मेघना में मिलती हैं। यहाँ कई छोटी-छोटी धाराएँ मिलकर एक चौड़ी एस्च्यूवरी बनाती हैं।

सिंधु नदी

भारत में इस नदी की कुल लंबाई 1346 किमी है। यह नदी तिब्बत के पठार की लद्दाख श्रेणी के उत्तरी भाग सेन्नगे ज़ंगबो नदी से निकलती है। इस नदी का अपवाह क्षेत्र पाकिस्तान में 93% और भारत में 5% और चीन में 2% है यह नदी पाकिस्तान में डेल्टा बनाती है। ऋग्वेद में इसे सप्त सिंधु, ईरान के जिंद-अवेस्ता में हप्त सिंधु (दोनो का ही अर्थ सात नदियाँ होता है) कहा गया है।

इसमें मिलने वाली प्रमुख नदियाँ जास्कर, स्यांग, शिगार-गिलकिट है, सतलज़ और चेनाब की सयुंक्त धारा भी इसमें मिलती है।

क्रमशः ………………..

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