गुजरात में पश्चिमी रेलवे के ग्रीन कॉरिडोर खंडो के रूप में गुजरात के ओखा कनालुस और पोरबंदर वंसजलिया सेक्शन की शुरुआत की गई, रेल मंत्री सुरेश प्रभु ने राजधानी दिल्ली से एक वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए इस ग्रीन कॉरिडोर को देश को समर्पित किया. ग्रीन कॉरिडोर का मतलब यह है कि इस कॉरिडोर में चलने वाली सभी ट्रेनें मानव मल-मूत्र को ट्रेन की पटरियों पर उत्सर्जित नहीं करेंगी|इसके लिए इन ग्रीन कॉरिडोर की सभी ट्रेनों को बायो टॉयलेट से लैस किया गया है|

प्रमुख विन्दु

1.इसके लिए 29 रेलों के लगभग 700 डिब्बों में जैव शौचालय उपलब्ध कराए गए हैं।

2.इसके बाद उत्तर रेलवे के जम्मू-कटरा (78 कि.मी.) खंड को मार्च, 2017 तक पूरी तरह से यह मानव अपशिष्ट से मुक्त बनाने का कार्य को शुरू किया गया है।

3.रेल मंत्रालय ने 14,000 यात्री डिब्बों में 48,000 जैव-शौचालयों की व्यवस्था कर चुका है। चालू वित्त वर्ष की शेष अवधि में रेल डिब्बों में अतिरिक्त 16,000 जैव-शौचालय लगाने की योजना बनाई गई है।

4.भारतीय रेलवे ने 2021-22 तक सभी ट्रेनों पूरी तरह से मानव अपशिष्ट से मुक्त कराने का लक्ष्य रखा है।

5.सभी डिब्बों में जैव-शौचालय लगाने के प्रावधान से रेलों से मानव अपशिष्ट पूरी तरह से जमीन पर गिरना बंद हो जाएगा जिससे रेलवे ट्रेकों में स्वच्छता और साफ-सफाई की स्थिति में सुधार लाने में मदद मिलेगी।

6.इन जैव-शौचालयों का ठीक उपयोग करने के लिए इनमें पानी की बोतलें, माचिस की डिब्बियों जैसे ठोस अपशिष्टों को नहीं फेंकना चाहिए अन्यथा ये काम करना बंद कर देंगे।

7.पर्यावरण अनुकूल जैव शौचालय प्रौद्योगिकी का विकास भारतीय रेलवे ने रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) के साथ संयुक्त रूप से किया है।

8.जैव-शौचालय फिट डिब्बों में, मानव अपशिष्ट शौचालय के टैंक में एकत्र किया जाता है और इसे बैक्टीरिया की मदद से विघटित किया जाता है।


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