आर्थिक सर्वेक्षण द्वारा 2018-19 के लिये पूरे वर्ष वास्तविक जीडीपी विकास दर 6.5 प्रतिशत रहने का अनुमान व्यक्त किया गया है, जो साल की दूसरी छमाही में 7.5 प्रतिशत के वास्तविक विकास दर पर आधारित है। वर्ष 2018-19 के लिये सर्वेक्षण ने वास्तविक जीडीपी विकास दर 7-7.5 के बीच रहने का अनुमान लगाया है। सरकार द्वारा संरचनात्मक सुधारों जैसे- जीएसटी, बैंकों को अतिरिक्त पूंजी देना, नियमों को उदार बनाने के उपाय तथा दिवाला और दिवालियापन संहिता, 2016 प्रक्रिया के माध्यम से समाधान आदि के आधार पर सर्वेक्षण ने आशावादी दृष्टिकोण अपनाया है।

विंदुवार सार

1.पिछले वर्ष के दौरान किये गए अनेक प्रमुख सुधारों से इस वित्‍त वर्ष में जीडीपी बढ़कर 6.75 प्रतिशत और 2018-19 में 7.0 से 7.5 प्रतिशत होगी, जिसके कारण भारत विश्‍व की सबसे तेज़ी से उभरती हुई मुख्य अर्थव्‍यवस्‍था के रूप में पुन:स्‍थापित होगा।

2.सर्वेक्षण में यह उल्‍लेखित किया गया है कि वर्ष 2017-18 में किये गए सुधारों को वर्ष 2018-19 में और अधिक सुदृ‍ढ़ किया जा सकता है।

3.स्‍थायी प्राथमिक मूल्‍यों पर ग्रॉस वैल्‍यू एडेड (जीवीए) में 2016-17 में 6.6 प्रतिशत की तुलना में 2017-18 में 6.1 प्रतिशत की दर से वृद्धि होने की उम्‍मीद है।

4.इसी प्रकार से 2017-18 में कृषि, उद्योग और सेवा क्षेत्रों में क्रमश: 2.1 प्रतिशत, 4.4 प्रतिशत और 8.3 प्रतिशत दर की वृद्धि होने की उम्‍मीद है।

5.सर्वेक्षण में कहा गया है कि दो वर्षों तक नकारात्‍मक स्‍तर पर रहने के बावजूद 2016-17 के दौरान निर्यातों में वृद्धि सकारात्‍मक स्‍तर पर आ गई थी और 2017-18 में इसमें तेज़ी से वृद्धि होने की उम्‍मीद है।

6.तथापि, आयातों में कुछ प्रत्‍याशित वृद्धि के बावजूद, वस्‍तु और सेवाओं के शुद्ध निर्यातों में 2017-18 में गिरावट आने की संभावना है।

7.इसी प्रकार शानदार आर्थिक वृद्धि के बावजूद, जीडीपी के अनुपात के रूप में बचत और निवेश में सामान्‍य रूप से गिरावट दर्ज की गई है।

8.निवेश दर में बड़ी गिरावट 2013-14 में आई, हालाँकि वर्ष 2015-16 में भी इसमें गिरावट दर्ज की गई। इसके अंतर्गत हाउसहोल्‍ड क्षेत्र में गिरावट आई, जबकि निजी कारपोरेट क्षेत्र में वृद्धि हुई थी।

9.सर्वेक्षण में कहा गया है कि भारत को विश्‍व में सबसे अच्‍छा निष्‍पादन करने वाली अर्थव्‍यवस्‍थाओं में से एक माना जा सकता है, क्‍यों‍कि पिछले तीन वर्षों के दौरान इसकी औसत विकास दर वैश्विक विकास दर की तुलना में लगभग 4 प्रतिशत अधिक और उभरते बाज़ार एवं विकासशील अर्थव्‍यवस्‍थाओं की तुलना में लगभग 3 प्रतिशत अधिक रही है।

10.सर्वेक्षण यह दर्शाता है कि 2014-15 से 2017-18 की अवधि के लिये जीडीपी विकास दर औसतन 7.3 प्रतिशत रही है, जो कि विश्‍व की प्रमुख अर्थव्‍यवस्‍थाओं की तुलना में सर्वाधिक है।

11.इस विकास दर को कम महँगाई दर, बेहतर करंट अकाउंट बैलेंस तथा जीडीपी अनुपात की तुलना में वित्‍तीय घाटे में उल्‍लेखनीय गिरावट के चलते हासिल किया गया है।

12.आने वाले वर्ष में कुछ कारकों, जैसे- अंतर्राष्‍ट्रीय बाजार में कच्‍चे तेल की कीमतों में वृद्धि होने की संभावना के कारण जीडीपी विकास दर पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ने संबंधी संभावनाएँ भी व्यक्त की गई हैं।

13.तथापि, 2018 में विश्‍व विकास दर में मामूली सुधार आने की संभावना के साथ जीएसटी में बढ़ते स्‍थायित्‍व, निवेश स्‍तरों में संभावित रिकवरी तथा अन्‍य बातों के साथ चालू ढाँचागत सुधारों से उच्‍च वि‍कास दर प्राप्‍त किये जाने की संभावना है।

14.सर्वेक्षण में स्पष्ट किया गया है कि उभरती मैक्रो इकॉनमिक चिंताओं के संबंध में आने वाले वर्ष में  नीतिगत निगरानी आवश्‍यक होगी, विशेष रूप से जब अंतर्राष्‍ट्रीय तेल की कीमतें ऊँचे स्‍तरों पर बनी रहती हैं या उच्‍च स्‍तरों पर स्‍टॉक मूल्‍यों में तेज़ी से गिरावट आती है, जिसके कारण पूंजी प्रभाव में एक अचानक ‘सुस्‍ती’ आ सकती है।

15.इसके अतिरिक्त सर्वेक्षण में इस बात पर भी बल दिया गया है कि विमुद्रीकरण केवल एक मामूली व्‍यवधान था, जिसका प्रभाव 2017 के मध्‍य से आगे नहीं पड़ा। इस पहलू पर अधिक ध्यान दिये जाने की आवश्‍यकता है।

16.विमुद्रीकरण एवं जीएसटी का एक उद्देश्य करदाता आधार को बढ़ाना था। सर्वेक्षण के अनुसार, इन नीतिगत कदमों के फलस्‍वरूप करदाताओं की संख्‍या में वास्‍तव में बढ़ोतरी हुई है, हालाँकि इनमें से कई करदाताओं ने ऐसी आय घोषित की है जो न्‍यूनतम सीमा स्‍तर के करीब है।

17.नवबंर 2016 से अक्तूबर 2017 यानी पूरे 12 महीने के दौरान मुख्य मुद्रास्फीति दर 4 फीसदी से नीचे दर्ज की गई। जबकि चालू वित्त वर्ष अप्रैल-दिसंबर के दौरान उपभोक्ता मूल्य सूचकांक औसतन करीब एक फीसदी रहा।

18.सर्वेक्षण के अनुसार, पिछले चार सालों में अर्थव्यवस्था में क्रमिक बदलाव देखा गया, जिसमें एक अवधि के दौरान मुद्रास्फीति काफी ऊपर चढ़ने या काफी नीचे गिरने की बजाय स्थिर बनी रही।

19.उपभोक्ता मूल्य सूचकांक के ज़रिये मापी जाने वाली प्रमुख मुद्रास्फीति दर पिछले चार सालों में नियंत्रित ही रही है। जाहिर है कि चालू वित्त वर्ष के पहले छह महीने में मुद्रास्फीति दर में जो गिरावट देखी गई वह खाद्य पदार्थों में रही। इसकी दर (-) 2.1 से 1.5 प्रतिशत रही।

20.वर्ष 2016-17 के दौरान सर्विस सेक्‍टर (निर्माण क्षेत्र सहित शीर्ष 10 सेक्‍टर) में एफडीआई इक्विटी प्रवाह 0.9 प्रतिशत घटकर 26.4 अरब अमेरिकी डॉलर के स्‍तर पर आ गया। हालाँकि, समग्र रूप से एफडीआई इक्विटी प्रवाह में 8.7 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है।

21.वर्ष 2017-18 (अप्रैल-अक्तूबर) के दौरान कुल एफडीआई इक्विटी प्रवाह में 0.8 प्रतिशत की वृद्धि की तुलना में इन सेवा क्षेत्रों में एफडीआई इक्विटी प्रवाह में 15.0 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई।

22.यह मुख्‍यत: दो सेक्‍टरों यथा दूरसंचार और कम्‍प्‍यूटर सॉफ्टवेयर एवं हार्डवेयर में अपेक्षाकृत अधिक प्रत्‍यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) होने से ही संभव हो पाया है।


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