वैश्विक प्रतिस्पर्धा सूचकांक 2016-17 और भारत

भारत विश्व आर्थिक मंच (डब्ल्यूईएफ) के वैश्विक प्रतिस्पर्धा सूचकांक में भारत 39 वें स्थान पर पहुच गया है कारोबारी जटिलताओं तथा वस्तु बाजार दक्षता में सुधार से भारत ने 16 स्थानों की छलांग लगा के अपनी रैंकिंग सुधारी है

इस सूचि में लगातार आठवीं बार स्विट्जरलैंड सबसे अधिक प्रतिस्पर्धी अर्थव्यवस्था बना और  पहले स्थान पर रहा। सिंगापुर दूसरे तथा अमेरिका तीसरे स्थान पर रहा। नीदरलैंड चौथे, जर्मनी पांचवें, स्वीडन छठे, ब्रिटेन सातवें, जापान आठवें, हांगकांग नौवें तथा फिनलैंड दसवें स्थान पर रहा।

यदि ब्रिक्स देशों में देखा जाये तो भारत चीन के बाद दुसरे स्थान पर आता है चीन इस सूचि में 28 वें स्थान पर है जहाँ भारत के इस सूचकांक में 4.52 अंक है तो पहले स्थान पर काबिज़ स्विट्जरलैंड के 5.81 अंक हैं पूर्व वर्ष 2015-16 की सूचि में भारत का स्थान 55 वां स्थान था |

इस सूचकांक के लिए किसी भी देश के प्रदर्शन को 3 कसौटियों पर कसा जाता है—बुनियादी जरूरतें, दक्षता बढ़ाने वाले कारक और नए प्रयोग एवं परिष्कार संबंधी कारक।

इस रिपोर्ट को भारत के लिए सारांश में कहा जाये तो निम्न 10 मत्वपूर्ण विन्दु सामने आते हैं

1.रिपोर्ट में कहा गया है कि मौद्रिक और राजकोषीय नीतियों में सुधार के साथ-साथ कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट ने भारत की अर्थव्यवस्था को स्थिर बनाया है और इस समय जी-20 देशों के समूह में सबसे तेज वृद्धि भारत की अर्थव्यवस्था कर रही है।

2.हाल ही में भारत ने सुधार के जो प्रयास किए गए हैं, उनमें सार्वजनिक संस्थानों के सुधार में वह 16 स्थान ऊपर आया है.

3.अर्थव्यवस्था में विदेशी निवेशकों तथा अंतर्राष्ट्रीय व्यापार की आमद को सुगम बनाने के मामले में 2 स्थान ऊपर आया है.

4.वित्तीय प्रणाली में पारदर्शिता बढ़ाने के मुद्दे पर भारत 15 स्थान ऊपर आया है।

5.बुनियादी जरूरत के पैमाने पर भारत 63वें स्थान पर है, जबकि 2015 में वह 80वें स्थान पर था।संस्थानों के लिहाज से भारत 40वें स्थान पर है जबकि पिछले साल 60वें स्थान पर था। भारत ने उच्च शिक्षा और प्रशिक्षण में भी काफी प्रगति की है।

6.सार्वजनिक कोषों के अन्य इस्तेमाल, अनियमित भुगतान तथा रिश्वतखोरी पर अंकुश, विवादों के निपटान के लिए कानूनी प्रारूप, लेखा और रिपोर्टिंग मानकों को सुदृढ़ करने तथा अल्पांश शेयरधारकों की हितरक्षा में सुधार के कारण यह हुआ है।

7.देश में विदेशी स्वामित्व के प्रचलन और कारोबार पर एफडीआई नियमों में शिथिलता जैसी पहलों का भी प्रभाव पड़ा है।

8.पुलिस सेवाओं के विश्वसनीयता के मामले में भारत पिछले वर्ष के 86वें स्थान से ऊपर उठकर इस वर्ष 53वें स्थान पर आ गया.

9.अवसंरचना के मामले में भारत इस वर्ष 68वें स्थान पर है, जबकि पिछ्ले वर्ष उसका 81वां स्थान था. अवसंरचना और सूचना एवं प्रौद्योगिकी के लिए रिपोर्ट में कहा गया है कि इसमें कमी अभी भी एक बड़ी बाधा बनी हुई है.

10.श्रम बाजार के मुद्दे पर भारत पिछले वर्ष के 103वें स्थान से ऊपर उठकर 84वें स्थान पर आ गया, लेकिन रिपोर्ट में श्रम सुधारों की पर्याप्त संभावना जताई गई है.