वैश्विक युवा विकास सूचकांक में भारत 183 देशो की सूची में 133 वें स्थान पर है और इस रैंकिंग के लिहाज से भारत की स्थिति बहुत ही ख़राब है|यह सूचकांक राष्ट्रमंडल सचिवालय ने रोजगार, शिक्षा, स्वास्थ्य, नागरिक और राजनीतिक क्षेत्र में युवाओं के लिये अवसर की संभावना के आधार पर तैयार किया है|

मुख्य तथ्य

इसमें कुल 183 देशों को शामिल किया गया, जिसमें भारत 133वें स्थान पर है, भारत अपने पडोसी देश  नेपाल (77), भूटान (69) और श्रीलंका (31) से भी पीछे है|सूची में शीर्ष 10 देशों में ज्यादातर यूरोप के हैं इसमें जर्मनी पहले स्थान पर है उसके बाद क्रमश: डेनमार्क (2), स्विट्जरलैंड (4), ब्रिटेन (5), नीदरलैंड (6), आस्ट्रेलिया (7), लक्जमबर्ग (8), पुर्तगाल (9) का स्थान है. गैर-यूरोपीय देशों में आस्ट्रेलिया तीसरे स्थान पर और जापान 10वें स्थान पर है|

रिपोर्ट ‘2016 यूथ डेवलपमेंट इंडेक्स’ अनुसार, आज दुनिया में प्रत्येक युवा आबादी में एक भारत में है और इस लिहाज से यह पृथ्वी पर उसे सबसे युवा देश बनाता है|हालांकि भारत की स्थिति अपेक्षाकृत नीचे है, लेकिन 2010-15 के दौरान इसमें लगभग 11 प्रतिशत का उल्लेखनीय सुधार हुआ है भारत दक्षिण एशियाई औसत से भी पीछे है|

शोध में यह भी कहा गया है कि विशेष रुप से स्वास्थ्य, शिक्षा और रोजगार के मामले में भारत पीछे है. इन क्षेत्रों में बेहतर निवेश से भारत जननांकीकीय लाभ बेहतर ढंग से उठा सकता है|

ऐसा नहीं है की भारत सरकार इसमें सुधार के लिए कुछ न कर रही हो , क्यों की भारत की आबादी का लगभग 65% हिस्सा युवा वर्ग में आता है इसलिए सरकार का ध्यान युवाओं के माध्यम से विकास लाने पर केन्द्रित है।

सरकार द्वारा पेश की गई राष्ट्रीय युवा नीति-2014 का उद्देश्य युवाओं की क्षमताओं को पहचानना और उसके अनुसार उन्हें अवसर प्रदान कर उन्हें सशक्त बनाना और इसके माध्यम से विश्वभर में भारत को उसका सही स्थान दिलाना है। युवाओं के व्यक्तित्व में सुधार लाने, उनमें नेतृत्व के गुण विकसित करने एवं उनमें ज़िम्मेदार नागरिक के गुण और स्वयंसेवा की भावना उत्पन्न करने के उद्देश्य से युवा मामले विभाग ने विभिन्न कार्यक्रमों को क्रियान्वित किया है|


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