सिक्ख एवं अंग्रेज

                         सिक्ख एवं अंग्रेज

सिक्ख सम्प्रदाय की स्थापना का श्रेय गुरु नानक को है, गुरु नानक के अनुयायी ही सिक्ख कहलाये | ये बादशाह बाबर एवं हुमायूँ के समकालीन थे |

सन 1496 ई. की कार्तिक पूर्णिमा को अध्यात्मिक पुनर्जीवन का आभास हुआ |

गुरु नानक की सन 1539 ई. करतारपुर में मृत्यु हो गयी |

गुरुमुखी लिपि का आरम्भ गुरु अंगद ने किया |

गुरु अमरदास ने हिन्दुओं से पृथक होनेवाले कई कार्य किये | हिन्दुओं से अलग विवाह पद्धति लवन को प्रचलित किया |

सिक्खों के सातवे गुरु हरराय (1645-61 ई.) हुए | इन्होंने दाराशिकोह को मिलने आने पर आशीर्वाद दिया |

सिक्खों के आठवे गुरु हरकिशन (1661-64 ई.) हुए | इनकी मृत्यु चेचक से हो गयी | इन्हें दिल्ली जाकर गुरुपद के बारे में औरंगजेब को समझाना पड़ा था |

सिक्खों के नौवें गुरु तेगबहादुर (1664-75 ई.) हुए | इस्लाम स्वीकार नहीं करने के कारण औरंगजेब ने इन्हें वर्तमान शीशगंज में गुरुद्वारा के निकट मरवा दिया |

गुरु गोविन्द सिंह अपने को सच्चा पादशाह कहा | इन्होंने सिक्खों के लिए पांच ‘ककार’ अनिवार्य किया अर्थात् प्रत्येक सिक्ख को केश, कंघा, कृपाण, कच्छा और कड़ा रखने की अनुमति दी और सभी लोगों को अपने नाम के अंत में ‘सिंह’ शब्द जोड़ने के लिए कहा |

गुरु गोविन्द सिंह का निवास-स्थान आनंदपुर साहिब था एवं कार्यस्थली पाओता थी |

1699 ई. में वैशाखी के दिन गुरु गोविन्द सिंह ने खालसा पंथ की स्थापना की |

पाहुल प्रणाली की शुरुआत गुरु गोविन्द सिंह ने किया |

बन्दा बहादुर : इनका जन्म 1670 ई. में पुंछ जिले के रजौली गाँव में हुआ था | इसके बचपन का नाम लक्ष्मणदास था | इनके पिता रामदेव भारद्वाज राजपूत थे |

बन्दा ने सरहिंद के मुगल फौजदार वजीर खां की हत्या कर दी |

मुगल बादशाह फरूरखसियर के आदेश पर 1716 ई. में बन्दा सिंह को गुरुदासपुर नांगल नामक स्थान पर पकडकर मौत के घाट उतार दिया गया |

शाहदरा क़त्लगढ़ी के नाम से विख्यात है जहाँ बन्दा ने हजारों मुगल सैनिकों को मौत के घाट उतार दिया था |

रणजीत सिंह : रणजीत सिंह का जन्म गुजरांवाला में 2 नवम्बर, 1780 ई. को सुकरचकिया मिसल के मुखिया महासिंह के यहाँ हुआ था | इनके दादा चरतसिंह ने12 मिसलों में सुकरचकिया मिसल को प्रमुख स्थान दिला दिया |

1798-99 ई. में रणजीत सिंह लाहौर का शासक बना | 25 अप्रैल, 1809 ई. को चार्ल्स मेटकाफ और महाराजा रणजीत सिंह के बीच अमृतसर की संधि हुई |

रणजीत सिंह का राज्य चार सूबों में बंटा था- पेशावर,

कश्मीर, मुल्तान एवं लाहौर |

महाराजा रणजीत सिंह का राज्य का विदेशी मंत्री फकीर अजीजुद्दीन एवं वित्त मंत्री दीनानाथ था |

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