भारतीय खगोलविदों के एक समूह ने आकाशगंगाओं के एक बड़े सुपरक्लस्टर की खोज की है| इस सुपरक्लस्टर का नाम ‘सरस्वती’ रखा गया है| यह सुपरक्लस्टर पृथ्वी से 4 बिलियन प्रकाश वर्ष दूर है तथा यह लगभग 600 मिलियन प्रकाश वर्ष की दूरी पर स्थित ‘ग्रेट वाल’ तक फैला हुआ है| इस प्रकार यह अब तक खोजे गए तथा सबसे दूर स्थित सुपरक्लस्टरों में से एक है|

क्या है आकाशगंगा क्लस्टर और सुपरक्लस्टर?

आकाशगंगाएँ ब्रह्मांड की निर्माण इकाईयाँ हैं जिनमें बड़ी संख्या में तारे विद्यमान होते हैं| आकाशगंगा समूहों में 3-20 आकाशगंगाएं हो सकती हैं तथा इनकी प्रचुर संरचना को ‘क्लस्टर’ कहा जाता है| आकाशगंगा क्लस्टर में सैकड़ों आकाशगंगाएँ होती हैं|

सुपरक्लस्टर ‘क्लस्टरों के क्लस्टर’(cluster of clusters) हैं , इसमें कम से कम दो क्लस्टर हो सकते हैं|

सरस्वती में 42 सुपरक्लस्टर हैं|क्लस्टर डार्क मैटर के तंतुओं और चादरों से जुड़े होते हैं तथा इनमें आकाशगंगाएँ होती हैं| सर्वप्रथम शाप्ले सुपरक्लस्टर की खोज की गई थी|

मुख्य तथ्य

1.आकाशगंगाओं के पहले सुपरक्लस्टर (द शाप्ले सुपरक्लस्टर) की खोज वर्ष 1989 तथा दूसरे(द स्लोअन ग्रेट वाल) की खोज वर्ष 2003 में की गई थी| मिल्की वे आकाशगंगा लानाकेआ सुपरक्लस्टर(Laniakea Supercluster) का भाग है| लानाकेआ सुपरक्लस्टर की खोज वर्ष 2014 में की गई थी|

2.पहली बार ऐसे सुपरक्लस्टर की खोज की गई है जो पृथ्वी से अत्यधिक दूरी(600 मिलियन प्रकाश वर्ष) पर है| शाप्ले क्लस्टर भी इसकी तुलना में लगभग 8-10 गुना नज़दीक है|

3.प्रोफेसर रायचौधरी शाप्ले नामक सुपरक्लस्टर की खोज करने वाली टीम का हिस्सा थे , इसका नाम अमेरिकी खगोलविद हरलो शाप्ले के नाम पर रखा गया है| प्रायः आकाशगंगाओं का नाम नदियों के नाम पर रखा जाता है मिल्की वे को ‘आकाश गंगा’ कहा जाता है| अतः इस सुपरक्लस्टर का नाम प्राचीन नदी ‘सरस्वती’ के नाम पर रखा गया है| प्रोफेसर रायचौधरी ने 15 वर्ष पूर्व इस क्षेत्र का अध्ययन करना प्रारंभ किया तथा उन्होंने दो क्लस्टरों को काफी नज़दीक पाया| उन्हें संदेह था कि ये क्लस्टर किसी बड़े समूह का हिस्सा है|

4.4 बिलियन प्रकाश वर्ष की दूरी पर सुपरक्लस्टरों के निर्माण का अवलोकन करने के लिये प्रेक्षक 4 बिलियन वर्ष पूर्व का अवलोकन करते हैं|  प्रकाश वर्ष, प्रकाश द्वारा एक वर्ष में तय की जाने वाली दूरी को कहा जाता है| ब्रह्मांड 13.8 बिलियन वर्ष पुराना है| अतः इस खोज से स्पष्ट हुआ कि इस प्रकार की बड़ी संरचना उस समय भी विद्यमान थी, जब ब्रह्मांड मात्र 10 बिलियन वर्ष पुराना था| इस प्रकार ब्रह्मांड की बड़ी संरचनाओं और स्वरूप के विषय में कई प्रश्न उठ खड़े हुए हैं|

5.हाल ही में खोजा गया सरस्वती सुपरक्लस्टर पृथ्वी से 600 मिलियन प्रकाश वर्ष की दूरी पर है| मिल्की वे पृथ्वी से तकरीबन 1,50,000 प्रकाश वर्ष की दूरी पर है|

6.सरस्वती सुपरक्लस्टर स्लोअन डिजिटल स्काई सर्वेक्षण की पट्टी 82(stripe 82) में है| यह पृथ्वी से 4,000 प्रकाश वर्ष की दूरी पर है| यह मीन राशि के तारामंडल पर स्थित है|

7.स्लोअन डिजिटल स्काई सर्वे एक महत्वकांक्षी योजना है जिसके माध्यम से ब्रह्मांड का डिजिटली त्रिविमीय प्रतिचित्रण किया जा रहा है| इस योजना के तीसरे चरण में स्लोअन डिजिटल स्काई सर्वे ने उत्तरी आकाशगंगाओं(जो 75,00 वर्ग डिग्री में फैला हुआ है) तथा दक्षिणी आकाशगंगाओं(740 वर्ग डिग्री) का प्रतिचित्रण किया| इनके मध्य की पट्टी को ‘स्ट्रिप 82’ कहा जाता है|


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