हरित क्रांति और भारत

देश की आज़ादी के बाद हमे कई समस्याओं से जूझना पड़ रहा था और इसमें से एक थी खद्यान्न के क्षेत्र में देश को आत्मनिर्भर बनाना जिसके लिए हरित क्रांति को अपनाना पड़ा इस क्रांति के पहले भारत ने कुछ बहुत ही विकट समस्याओं का सामने किया जो थीं –

1.अमेरिका से PL480 की सहायता बंद।

2.1962 में चीन के साथ युद्ध।

3.1965 में पाकिस्तान के साथ युद्ध छिड़ा।

4.1965–66 में देश में सूखे की स्थिति।

भारत में हरित क्रान्ति का उद्देश्य अल्पकाल में कृषि उत्पादन से सुस्पष्ट सुधार और  एक लम्बी अवधि तक ऊंचे कृषि उत्पादन के स्तर का बने रहना था , हरित क्रांति का आरम्भ वर्ष 1967–68 का है|

इस क्रांति के काई सकारात्मक और नकारात्मक परिणाम सामने आये लेकिन संक्षेप में यह देश के लिए बहुत ही महत्त्वपूर्ण ऐतिहासिक निर्णय रहा|

हरित क्रान्ति से सभी फसलें समान रूप से लाभान्वित नहीं हुई। गेहूं के उत्पादन पर हरित क्रान्ति का सबसे अधिक प्रभाव पड़ा जबकि अन्य फसलों पर इसका प्रभाव कम रहा है। गेहूं के उत्पादन में भी क्रांति के पहले वर्षों में जितनी वृद्धि देखने को मिली बाद के वर्षों में वह दिखाई नहीं दी। यदि गेहूं की फसल में और नये सुधार नहीं किए जाते तो इस बात की पूर्ण आशंका थी कि निकट भविष्य में इसके उत्पादन में जड़ता आ सकती थी।

खाद्यान्न के उत्पादन में सर्वाधिक वृद्धि गेहूं के उत्पादन में हुई जिसके कारण इसे गेहूं की क्रांति भी कहा जाता है।दूसरे स्थान पर चावल का उत्पादन रहा परन्तु गेहूं की तुलना में इसका उत्पादन कम रहा।व्यापारिक फसलों में गन्ने के उत्पादन में असाधारण वृद्धि हुई। इसी प्रकार तिलहनों और कपास के उत्पादन में भी वृद्धि हुई। यद्यपि, वृद्धि की दर धीमी रही।

मोटे अनाजों (ज्वार, बाजरा और मक्का) का उत्पादन या तो स्थिर बना रहा या उसमें बहुत धीरे-धीरे व अनियमित रूप से वृद्धि हुई।जहां तक दालों का संबंध है इसका उत्पादन लगभग स्थिर रहा।

महत्त्वपूर्ण तथ्य-

1.हरित क्रान्ति के जनकः नोरमन ई- बोरलाग (Norman E. Borlaug)

2.हरित क्रान्ति शब्द के जनकः डॉ विलियम ग्राण्ड (William Gande) (अमेरिकी वैज्ञानिक)*

3.भारत में हरित क्रान्ति के जनकः डॉ एम- एस- स्वामीनाथन (Dr M.S. Swaminathan)

4.भारत में फिलिपींस से चावल एवं मैक्सिको से गेहूं के बीज आयात किए गए तथा भारत में ब्रीडिंग द्वारा गेहूं और चावल की अधिक उपज देने वाली प्रजातियां विकसित की गई।

5.पंतनगर (उत्तराखंड): भारत में हरित क्रान्ति का जन्म स्थली कही जाती है।जब 1958 में भारत ने पहली बार 120 लाख टन गेहूं के उत्पादन से हरित क्रान्ति की शुरूआत की।

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