RBI की नयी मौद्रिक नीति( अक्टूबर)

उर्जित पटेल के गवर्नर बनने के बाद रिजर्व बैंक की यह पहली मौद्रिक नीति है. लेकिन और भी कई वजहें हैं जो इस मौद्रिक नीति को पहले के मुकाबले अलग बनाती हैं

भारतीय रिजर्व बैंक ने अपनी मौद्रिक नीति में नीतिगत ब्याज दरों में 0.25 फीसदी कटौती करने की घोषणा की. अब रेपो रेट 6.5 फीसदी से घटकर 6.25 फीसदी रह गया है. इस दर पर रिजर्व बैंक दूसरे बैंकों को पैसे उधार देता है. रिवर्स रेपो रेट की बात करें तो यह अब 5.75 फीसदी हो गया है. इस दर पर रिजर्व बैंक दूसरे बैंकों से पैसे लेता है.

उर्जित पटेल के गवर्नर बनने के बाद रिजर्व बैंक की यह पहली मौद्रिक नीति है. लेकिन इस बार कई दूसरी बातें हैं जो इस मौद्रिक नीति को पहले के मुकाबले अलग बनाती हैं.

1. पहले यह होता था कि रिजर्व बैंक के गवर्नर को ही नीतिगत ब्याज दरों के मामलों में अंतिम निर्णय लेना होता था. वह रिजर्व बैंक के अपने सहयोगियों से इस बारे में सलाह कर सकता था. साथ ही उसे राय-मशविरा देने के लिए एक समिति भी 2009 से काम कर रही थी. इस समिति को तकनीकी सलाहकार समिति नाम दिया गया था. लेकिन इसकी राय मानने के लिए गवर्नर बाध्य नहीं था,इस साल अगस्त तक की रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति इसी व्यवस्था के तहत आई थी|

लेकिन नए गवर्नर पटेल ने जो घोषणाएं की हैं, उन्हें छह सदस्यों वाली मौद्रिक नीति समिति ने तय किया है. इस समिति के अध्यक्ष गवर्नर खुद हैं.

2.पहले मौद्रिक नीति में सरकार की कोई भूमिका ही नहीं होती थी इस बार लेकिन मौद्रिक नीति तय करने के लिए जो समिति बनी है, उसमें सरकार के तीन प्रतिनिधि हैं ये सभी अकादमिक क्षेत्र से हैं लेकिन समिति में इनकी पहचान सरकार के प्रतिनिधि के तौर पर ही है और इनका चयन भी सरकार ने ही किया है|

3.अगस्त में उपभोक्ता मूल्य सूचकांक 5.05 फीसदी पर रहा भारत सरकार की ओर से रिजर्व बैंक को महंगाई दर को चार फीसदी पर रखने का लक्ष्य दिया गया था |

लेकिन इस बार की मौद्रिक नीति को देखकर ऐसा लगता है कि रिजर्व बैंक में नए गवर्नर और मौद्रिक समिति की जो नई व्यवस्था बनी है, उसने महंगाई दर का लक्ष्य चार फीसदी नहीं बल्कि छह फीसदी मानकर नीतियों का निर्धारण शुरू कर दिया है|

4.इस बार की मौद्रिक नीति जारी करने के वक्त में भी बदलाव दिखा. पहले की व्यवस्था में मौद्रिक नीति की घोषणा रिजर्व बैंक के गवर्नर दिन में 11 बजे कर देते थे. लेकिन इस बार नीति की घोषणा दोपहर ढाई बजे की गई. रिजर्व बैंक की ओर से मौद्रिक नीति जारी करने के वक्त में बदलाव को लेकर यह कहा गया कि अब निर्णय एक व्यक्ति को नहीं बल्कि समिति को करना है, इसलिए दिन के पहले हिस्से का इस्तेमाल समिति की बैठक के लिए होगा|