RBI द्वारा रेपो रेट में कोई परिवर्तन नहीं

भारतीय रिज़र्व बैंक द्वारा रेपो दर को अपरिवर्तित रखने का निर्णय लिया गया है| रिज़र्व बैंक के कथनानुसार, चालू वर्ष की दूसरी तिमाही में 50 आधार बिंदुओं की कमी तथा उच्च मूल्य वाले नोटों की वापसी का वर्ष 2016-17 की आर्थिक वृद्धि दर पर अनिश्चित प्रभाव पड़ा हैं|

ख़ास बातें

1.छह सदस्यीय मौद्रिक नीति समिति द्वारा रेपो दर को 6.25 प्रतिशत पर सीमित रखने के पक्ष में मतदान किया गया है| एमपीसी के अनुसार 500 व 1000 के नोटों के विमुद्रीकरण के परिणामस्वरूप ही इसका मूल्यांकन किया गया है|

2.हालाँकि रिज़र्व बैंक बैंकिंग व्यवस्था में और अधिक तरलता लाने के उद्देश्य से 16 सितम्बर से 11 नवम्बर के बीच बैंक जमाओं पर लगने वाले 100 प्रतिशत नकद आरक्षित अनुपात (Cash Reserve Ratio- CRR) यानी केंद्रीय बैंक में रखी जाने वाली जमाओं के अनुपात को समाप्त करने का निर्णय लिया  गया है|

3.वर्ष 2016-17 की पाँचवी द्विमासिक मौद्रिक नीति के विवरण को प्रस्तुत करते हुए रिज़र्व बैंक ने वित्तीय वर्ष 2017 के लिये वृद्धि दर को (विमुद्रीकरण के नकारात्मक प्रभावों के चलते) 7.6 प्रतिशत से घटाकर 7.1 प्रतिशत कर दिया है|

4.रिज़र्व बैंक द्वारा जारी वक्तव्य में यह स्पष्ट किया गया है कि वृद्धि दर तथा मुद्रास्फीति पर विमुद्रीकरण का प्रभाव केवल कुछ समय के लिये ही दिखाई देगा|

5.हालाँकि मुद्रास्फीति के कारण विश्व में कच्चे तेल के मूल्य में बढ़ोतरी होगी तथा कुछ खाद्य सामग्रियों (गेहूँ, चना तथा चीनी) के मूल्य में भी बढ़ोतरी होने की सम्भावना बनी रहेगी|  

इसके प्रभाव

1.ब्याज दर- मौद्रिक नीति समिति के इस निर्णय का उद्देश्य चालू वित्तीय वर्ष (2016-17) की चौथी तिमाही तक मुद्रास्फीति की दर को दीर्घावधि के लिये 5 प्रतिशत तथा अल्पकाल के लिये 4 प्रतिशत (2% कम अथवा ज़्यादा) तक लाना है|

2.वृद्धि दर में कमी- चालू वित्तीय वर्ष की तीसरी तिमाही में वृद्धि दर में होने वाले नुकसान, कृषि में अधिक उत्पादन एवं सातवें वेतन आयोग के क्रियान्वयन के फलस्वरूप चौथी तिमाही पर पड़ने वाले प्रभावों के परिणामस्वरूप वर्ष 2016-17 के लिए सकल मूल्य वर्द्धन (Gross Value Added – GVA) को 7.6 प्रतिशत से 7.1 प्रतिशत कर दिया गया है|

3.मुद्रास्फीति की शुरुआत- गौरतलब है कि नोटों की वापसी के कारण चालू वित्तीय वर्ष की तीसरी तिमाही में मुद्रास्फीति की दर में 10 से 15 आधार बिंदु तक की कमी आने की संभावना है| इन कारकों को संज्ञान में लेते हुए चालू वित्त वर्ष की चौथी तिमाही में मुद्रास्फीति की दर को 5 प्रतिशत तक निर्धारित किया गया है|

पुराने नोटों को बैंकों में जमा करने के लिये अब केवल दो सप्ताह ही शेष रह गए हैं| हालाँकि इस समय-सीमा के बावजूद मार्च 2016 के अंत तक चलन में रही तकरीबन 14.17 लाख करोड़ रुपए की मुद्रा के तकरीबन 81 प्रतिशत (11.55 करोड़) अंश का प्रवाह बैंकिंग व्यवस्था में हो चुका है| अतः स्पष्ट है कि रिज़र्व बैंक के इस निर्णय का उद्देश्य विमुद्रीकरण के समय उच्च गुणवत्तायुक्त नोटों की जालसाजी को रोकना तथा कैश के रूप में विद्यमान काले धन को उजागर करना था|

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